अभी ऑफिस मे काम करते करते कॉलेज और स्कूल की सारी यादे आँखों के सामने आगयी | वो भी क्या दिन हुआ करते थे कीसी  चीज़ की टेंशन नही थी बस मस्ती करो खेलो कूदो और पपेर्स के टाइम थोड़ी सी टेंशन लो और पास हो जाओ | तब हम खुद  की मर्ज़ी के खुदा थे | तब ज़िन्दगी की हर फिजा नई लगती थी , ख्वाब खिला करते  थे लाखों में | तब हर पल कुछ नया हुआ करता था | तब हम नौकरी के पीछे रहेते थे हमेशा और बोला करते थे की “यार जब नौकरी लगी गी तो यह करे गई वो करे गई , सब जब मिले गई तो भुत अच्छा लगे गा ” , मगर अब जब नौकरी है तो जिनगी की राहे बदल गयी है | हर पल यही सोचते रहेते है की ” अब केसे लिखू फिर से नयी दासता या खानी “| पहेल हर सवाल का जवाब “हां ” से चालु होता था और अब जवाब “क्यू ” से चालू होता है | एस हा और क्यू के बीच  मे कितना अंतर है यह सब जानते है |

कुछ एक उदहारण एस परकार है :
१) पहेल : यार घर जाने का मन हो रहा है , चलो कल मे घर होके आता हु !
    अब : यार घर जाने का मन हो रहा है , मगर नही जा पाऊगा छुट्टी नही मिलिगी और जब सर से पुछु गा तो वो पूछे गई की क्यों जाना है |
२) पहेल : चलो मूवी चलते है ?
    अब : यार अभी ऑफिस से आये है क्या करे गई मूवी चल के टीवी पे देख्लेगे नही तो सन्डे को चल ते है |
३) पहेल : चलो शोपिंग करने चलते है सन्डे को ?
    अब : यार सन्डे को शोपिंग का मन कर रहा है मगर बहुत काम है सन्डे को घर  के सब्जी लानी है राशन लाना है और भी बहुत काम है न सब से जादा सोना है |
मगर यही ज़िन्दगी है हर पहलउ को जीना ही जिनगी है , हर मुश्किलों का सामना करना ही ज़िन्दगी है | मुझे अभी “उड़ान ” फिल्म का गाना याद आरहा है , जीस की कुछ एक पंक्तिया एस प्रकार है
     chadhti lehren laangh na paayen kyun haanpti si naav hai teri naav hai teri
tinka tinka jod ke saanse kyun haanpti si naav hai teri naav hai teri
ulti behti dhaar hai bairi dhaar hai bairi
ke ab kuch kar ja re panthi..
jigar juta kya baat baandh le hai baat thehri jaan pe teri jaan pe teri
Haiya Ho Ki Taan Saath Le Jo Baat Tehri Jaan Pe Teri Shaan Pe Teri