A scene from Lage Raho Munnabhai (The scene where Vidya Balan is introduced for the first time… )

The words created such a lasting effect on me that I have to give that dialogue a seperate space in my blog. Here it goes
The scene here :
शहर की इस दौड़ में दौड़ कर करना क्या है?
अगर यही जीना है दोस्तों, तो फिर मरना क्या है?
 
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है
भूल गए,भीगते हुए टहलना क्या है?

Serials के किरदारों का सारा हाल है मालूम|
पर माँ का हाल पूछने की फुरसत कहाँ है?

अब रेत पे नंगे पाँव टहलते क्यों नहीं?
108 है channel, पर दिल बहेलते क्यों नहीं?

Internet की दुनिया से तो touch में है
लेकिन पड़ोस में कौन रहता है, जानते तक नहीं

Mobile, Landline सब की भरमार है,
लेकिन जिगरी दोस्त तक पहुचें, ऐसे तार कहाँ है?

कब डूबते हुए सूरज को देखा था, याद है?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है?

शहर की इस दौड़ में दौड़ कर करना क्या है?
अगर यही जीना है दोस्तों, तो फिर मरना क्या है?